
“प्याज रोटी वाली चुड़ैल की दास्तान एक रहस्यमयी और भयावह किस्सा मानी जाती है, जो हकीकत और अंधविश्वास के बीच का रोचक मेल है। उत्तराखंड और दिल्ली से जुड़ी यह घटना लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। सवाल यह रहा कि क्या यह सिर्फ एक अफवाह थी या वाकई कोई अलौकिक घटना?
सबसे प्रसिद्ध घटनाएं उत्तराखंड के अल्मोड़ा और दिल्ली से संबंधित बताई जाती हैं। अस्सी के दशक में अल्मोड़ा में यह चर्चा फैलने लगी कि रात के अंधेरे में एक बुजुर्ग महिला लोगों के दरवाज़ों पर दस्तक देती और घर के किसी सदस्य का नाम लेकर पुकार लगाती। उसका अनुरोध केवल रोटी और प्याज होता। लेकिन अफवाह थी कि जो भी उसे यह चीज़ें देता, उसकी मृत्यु तीन दिनों के भीतर हो जाती। यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और डर इतना गहराया कि लोग अपने घरों पर हल्दी या गेरू से हाथों की छाप बनाकर सुरक्षा करने लगे। माना जाता था कि ऐसा करने से वह महिला दरवाज़े से अंदर प्रवेश नहीं कर पाएगी।

कहानी की जड़ें तकरीबन ढाई सौ साल पुराने उत्तर प्रदेश के एक छोटे गांव से जुड़ी बताई जाती हैं। उस समय गांव में एक औरत अपने बच्चों के साथ फूस की झोपड़ी में रहती थी। गांववालों को संदेह हुआ कि किसी के घर से बार-बार प्याज और रोटियां चोरी हो रही हैं। जांच करने पर जब ग्रामीण पहुंचे तो उन्होंने उस औरत की झोपड़ी में सड़े प्याज और बासी रोटियों के ढेर के साथ उसके दोनों बच्चों के शव देखे। कहा जाता है कि वह औरत धीरे-धीरे अपने बच्चों का मांस खा रही थी। क्रोध में भरकर गांववालों ने उसे जिंदा आग में झोंक दिया। मरते समय उसने श्राप दिया कि वह लौटेगी और गांव के लोगों की जान ले लेगी। इसके कुछ समय बाद आसपास के गांवों में रात को एक बूढ़ी औरत के दिखाई देने और रोटी-प्याज मांगने की बातें फैलने लगीं।
साल 2005 में, ऐसी ही घटनाएं दिल्ली में भी सुनाई दीं। यहां भी कहा गया कि एक बुढ़िया लोगों के घरों में जाकर प्याज और रोटी मांगती थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि शिकार सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि वकील, पुलिसवाले और सरकारी अफसर तक बने। डर का माहौल इतना बढ़ा कि बच्चों को बाहर अकेले जाने से रोका जाने लगा। लोग घरों के दरवाज़ों पर हल्दी के हाथों की छाप बनाने लगे और मोहल्लेवाले इकट्ठा होकर पहरा देने लगे।
इन घटनाओं पर लोगों की राय बंटी रही। कुछ का कहना था कि यह “मास हिस्टेरिया” यानी सामूहिक भ्रम की स्थिति थी, जब अफवाहें और डर मिलकर लोगों के मन में वास्तविक दिखाई देने लगता है। वहीं कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों से उस रहस्यमयी औरत को देखा है और अपने परिजनों को खोया है।
“प्याज रोटी वाली चुड़ैल” केवल एक कहानी है या सच्चाई, इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है। विज्ञान इसकी व्याख्या अफवाह मानकर करता है, मगर जिन लोगों ने इसका असर महसूस किया, उनके लिए यह उनके जीवन की डरावनी यादों का हिस्सा बन चुकी है।”