
यह कहानी एक लड़के और एक छलावे वाले प्रेत से हुई वास्तविक-समान घटना के बारे में है। एक रात उसका सामना उस अजीब प्राणी से हो गया।
यह घटना उस समय की है जब मैं अपनी मौसी के घर छुट्टियाँ मनाने गया था — गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं। मेरे मौसा डॉक्टर हैं और उन्हें क्वार्टर मिला हुआ था। वे ऊपर वाली मंजिल पर रहते थे। उनके फ्लैट की बालकनी के पीछे घना जंगल था और रात में वहाँ से अजीब-अजीब आवाज़ें आती रहती थीं।
एक बार हम सब रात को खाना खाकर बालकनी में बैठे बातें कर रहे थे। तभी मेरी मौसी का बेटा बोला— किसके पास इतना साहस है कि रात के वक़्त उस जंगल के भीतर जाए? हम सब हँस पड़े और उसे टोका कि ऐसी बातों का क्या मतलब, कौन रात में उस जंगल में जाएगा; कहीं जंगली जानवर मिल गए तो मुसीबत बन जाएगी। सब हँस रहे थे।
मेरे मौसेरे भाई ने कहा कि वह मज़ाक नहीं कर रहा। उसके स्कूल के कुछ दोस्त बताते हैं कि कभी एक लड़का उसी तरह उस जंगल में गया और फिर लापता हो गया। गांव वाले कहते थे कि उस लड़के को किसी ने उसकी आवाज़ लगाई—जैसे पिता बुला रहे हों—और वह आवाज़ का पीछा करते-करते जंगल में चला गया और फिर वापस नहीं आया। मैंने सोचा ये सब कहानियाँ हैं — अगर वह लौटा ही नहीं तो कैसे पता चला कि आवाज़ उसके पिता की थी?

वो बोला कि उसके पिता थोड़ी दूरी पर ही थे और उन्होंने भी उसी तरह की आवाज़ सुनी थी — जैसे कोई उन्हें बुला रहा हो। वे भागकर वहाँ पहुँचे पर उनका बेटा नदारद था। तब से कोई उस जंगल की तरफ नहीं जाता।
उस कहानी पर मैं खिलखिला कर हँसा — जंगल का भूत जो लोगों को गायब कर दे! बाद में हम टीवी देखने चले गए। कुछ देर बाद ताज़ा हवा पाने मैं फिर से बालकनी पर गया। रात में ठंडी हवा चल रही थी। मैं जंगल की ओर टकटकी लगाए खड़ा था कि अचानक मैंने अपने मौसेरे भाई को ही जंगल के किनारे खड़ा दिखा — वह मेरी ओर देखकर मुस्कुरा रहा था और इशारे से बुला रहा था: “तुम भी आओ।”
मुझे आश्चर्य हुआ — अभी तो वही टीवी देख रहा था, अब यहाँ कैसे आ गया? मैंने पीछे देखा तो वहाँ कोई नहीं था; लगा शायद उसने नीचे आकर मुझे बुलाया। उसने फिर से कहा, “अरे! क्या देख रहे हो, नीचे आओ—थोड़ी सैर करेंगे।” मैंने दरवाज़े की ओर कदम बढ़ाया ही था कि उसी समय मेरा असली भाई बाथरूम से बाहर निकला। मैं ठिठक गया; रोंगटे खड़े हो उठे। अगर वह यहाँ है तो जो मेरे सामने खड़ा दिखाई दिया वो कौन था?
मैंने असली भाई से पूछा कि तुम अभी बाथरूम से कब आए? वह बुरा मान गया और बोला कि वह तो वहीं बैठा रहा, नीचे नहीं गया; मुझे लगा मैं उसे डरा रहा हूँ। इतना कहकर वह टीवी देखने चला गया। मैं हैरान था — क्या मैंने सचमुच जो देखा वह देखा था?
उस रात मुझे किसी की बुलाहट सुनाई दी — “मैं तुम्हारा बहुत समय से इंतज़ार कर रहा हूँ, जल्दी आओ, फिर हम साथ में उस जंगल में घूमेंगे।” इस आवाज़ में अब मेरे भाई की तरह नहीं थी; यह गला भरा, बूढ़े आदमी जैसी आवाज़ थी—किसी लंबे, सिगरेट पीने वाले व्यक्ति की। पूरी रात वह आवाज़ आती रही। सुबह जब मैंने सबको बताया तो सबने कहा कि यहाँ ऐसे अनुभव आम हैं — उस ओर ध्यान मत देना और कभी भी उस जंगल में मत जाना।
कुछ दिनों तक मुझे आवाज़ें सुनाई देती रहीं, फिर अचानक रुक गईं। कुछ दिनों बाद मेरे पिता मुझे लेने आए क्योंकि मेरी छुट्टियाँ ख़त्म होने वाली थीं। यहाँ के लोगों का कहना था कि उस जंगल में रहने वाला प्रेत—जिसे वे ‘छलावा’ कहते हैं—किसी को भी अपने पीछे खींच लेता है और जो भी उसके पीछे चला जाता है, लौट कर नहीं आता।