
चुड़ैलों की कहानियाँ आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन जब कोई इंसान अपने ही कर्मों और पापों की वजह से शापित चुड़ैल बन जाता है, तब उसकी कहानी डर से भी ज्यादा सोचने पर मजबूर कर देती है। ऐसी ही सच्चाई से जुड़ा भयानक किस्सा मेरी एक जान-पहचान वाली लड़की नेहा के साथ हुआ था। यह घटना कई साल पुरानी है, जब नेहा अपने छोटे कस्बे बरहामपुर (बंगाल) में अपनी माँ के साथ रहती थी।
काला जादू और अंधविश्वास
नेहा की माँ को काले जादू और तंत्र-मंत्र का गहरा ज्ञान था। वह अमावस की रात को गाँव के किनारे स्थित सुनसान जंगल में जाया करती थी। वहां कभी वह जानवरों की बलि देती, तो कभी किसी पर काला टोना-टोटका करके उसकी मौत तक करवा देती। धीरे-धीरे पूरे इलाक़े में लोग नेहा की माँ को चुड़ैल कहने लगे और उसे हर वक्त अभिशाप देने लगे।

नेहा की दूरी
समय बीतते-बीतते नेहा बड़ी हुई। माँ के इन कामों से वह बेहद परेशान थी। आखिरकार उसने अपने घर को छोड़ दिया और कुछ समय बाद अपनी पसंद के लड़के से शादी कर ली। लेकिन उसकी माँ अपने कर्मों से बाज नहीं आई। काली शक्तियों के नशे में चूर होकर, वह और भी खतरनाक बन गई।
पापों का संचय
नेहा की माँ ने तंत्र विद्या में इतनी गहराई पा ली थी कि वह दानव और प्रेतात्माओं को वश में कर लेती और लोगों पर छोड़ देती। उसका खौफ इस कदर बढ़ गया कि कोई भी इंसान उससे मिलना तक पसंद नहीं करता था। लेकिन जैसे-जैसे पापों का बोझ बढ़ता गया, वैसे-वैसे उसका अंत भी करीब आता चला गया।
अभिशाप का असर
एक दिन अचानक उसे तेज़ बुखार और लकवे ने घेर लिया। अब उसकी सारी विद्या किसी काम नहीं आई। न तो उसके जादू ने असर दिखाया और न ही उसकी शक्तियाँ उसे बचा सकीं। धीरे-धीरे उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टर तक इलाज करने से डरने लगे।
आत्माओं का कहर
जितनी आत्माओं को उसने वर्षों तक सताया था, वे सब अब उसके चारों तरफ मंडराने लगीं। रात को उसके घर से अजीब चीखें और कराहने की आवाज़ें सुनाई देतीं। कहते हैं, बलि चढ़ाए गए मासूम बच्चों और निर्दोष लोगों की आत्माएँ उसके शरीर को खरोंच-खरोंच कर खा रही थीं। कुछ ही समय में उसका शरीर सड़ने लगा और उसमें कीड़े पड़ गए।
दर्दनाक अंत
लोग दूर से देखकर कहते, “इस औरत का यही हाल होना चाहिए। जिसने दूसरों की ज़िंदगी बर्बाद की, अब वही अपने कर्मों के जाल में फँस गई है।” आखिरकार कई दिनों की तड़प के बाद, नेहा की माँ ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के साथ ही उन तमाम डरावनी आत्माओं ने उसकी आत्मा को घेर लिया और उसे अपने साथ ले गईं।
सीख
दुनिया में अच्छाई और बुराई दोनों शक्तियाँ हैं। लेकिन इंसान अगर बुराई के रास्ते पर चल पड़े, तो उसके कर्म ही उसके लिए शाप बन जाते हैं। नेहा की माँ का अंत यही साबित करता है कि चाहे शक्तियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, कुदरत का न्याय हमेशा सच्चा और अटल रहता है।