
एक रात मैं अपने फोन पर भटकती आत्मा की कहानी पढ़ते-पढ़ते कब नींद में चला गया, पता ही नहीं चला। आधी रात करीब दो बजे मेरी नींद टूटी। कमरे में अजीब सा सन्नाटा और थमी हुई ठंडी हवा का अहसास हो रहा था। मैंने खिड़की खोली तो देखा बाहर बहुत तेज़ हवाएँ चल रही थीं। हॉस्टल का इलाका सुनसान था और पीछे घना जंगल फैला हुआ था। मेरा कमरा तीसरी मंजिल पर था और उसकी खिड़की सीधे उसी जंगल की तरफ खुलती थी।
जैसे-तैसे मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगा। तभी अचानक “टक-टक” की हल्की आवाज़ आई। मेरी आँखें खुलीं तो देखा खिड़की के शीशे पर एक हाथ knock कर रहा है। यह देखकर मेरा खून जम गया, क्योंकि तीसरी मंजिल तक कोई इंसान पहुँच ही नहीं सकता। देखते-देखते उस हाथ के साथ दूसरा हाथ भी दिखने लगा और दोनों खिड़की को जोर-जोर से पीटने लगे।

मैंने ध्यान से देखा तो एक झुर्रियों से भरा चेहरा और सफेद कपड़ों में लिपटी एक औरत शीशे से चिपकी हुई थी। उसकी नज़रें सीधी मेरी आँखों में टिकी हुई थीं। वह लगातार खिड़की खोलने की कोशिश कर रही थी। डर के मारे मेरी आवाज़ गले में अटक गई, मैं हिल भी नहीं पा रहा था। अचानक वह औरत शांत हो गई और इशारे से मुझसे खिड़की खोलने को कहने लगी। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था अभी बाहर निकल कर गिर पड़ेगा।
अचानक एक झटके में वह नजरों से गायब हो गई। मैंने चैन की सांस ही ली थी कि खिड़की पर ज़ोर-ज़ोर से दस्तक होने लगी। घबरा कर मैंने तुरंत पर्दा खींचकर खिड़की को ढक दिया और चीखने लगा। मेरी चीख सुनकर दोस्त और चौकीदार दोनों दौड़े आए।
सब आए तो देखा कि कमरे में मैं बुरी तरह काँप रहा हूँ। जब मैंने पूरी घटना बताई तो किसी ने यकीन नहीं किया। लेकिन सबने सोचा कि यह मुझे कोई बुरा सपना आया होगा। उस रात चौकीदार वहीं मेरे पास ठहर गया।
रात के आखिरी पहर उसने मुझसे धीरे से पूछा— “बाबूजी… आपने उसकी आँखों में तो नहीं देखा न?”
मैंने घबराकर कहा— “किसकी आँखों में?”
वह बोला— “उस चुड़ैल की। अगर आप उसकी आँखों में देख लेते तो अब तक वो आपको अपने साथ ले जा चुकी होती। इस कमरे में कई लड़के पहले रह चुके हैं, लेकिन धीरे-धीरे गायब हो गए। किसी को आज तक नहीं मिला। कहते हैं वो चुड़ैल ही उन्हें खा गई।”