
सितम्बर का महीना शुरू होते ही मौसम में एक अजीब-सी ठंडक और बदलाव महसूस होने लगता है। पेड़ों से झरते पत्ते जैसे पुरानी यादों को पीछे छोड़ने का संदेश देते हैं। इन्हीं दिनों की एक सुबह, अयान, नेहा और रोहित – तीन दोस्त – जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़े थे, जिसे वे खुद “त्रिकोण” कहते थे।
अयान और रोहित बचपन से सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों की पढ़ाई, खेल और सपनों की राह लगभग एक जैसी थी। नेहा उनकी कक्षा में नई आई थी और धीरे-धीरे दोनों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई। पढ़ाई में तेज़, स्वभाव में सरल और हर काम में ईमानदार, नेहा ने दोनों के दिलों को छुआ।
समस्या तब शुरू हुई जब अयान और रोहित – दोनों को ही यह एहसास हुआ कि वे नेहा को सिर्फ़ दोस्त से ज़्यादा मानने लगे हैं। यह स्थिति किसी साधारण उलझन की तरह नहीं थी, बल्कि उनके गहरे रिश्ते को परखने वाला समय था।
सितम्बर की वह सुबह कॉलेज कैंपस में तीनों साथ बैठे थे। पेड़ों से गिरते पीले पत्ते, ठंडी हवा और चिड़ियों की आवाज़ – सब कुछ सामान्य था, पर तीनों के दिलों में तूफ़ान मचा हुआ था।

नेहा ने चुप्पी तोड़ी –
“दोस्ती और प्यार कभी-कभी एक ही राह पर नहीं चलते। लेकिन जो सच्चा होता है, वही टिकता है।”
अयान और रोहित ने एक-दूसरे की ओर देखा। दोनों के मन में यह स्पष्ट हो चुका था कि दोस्ती का बंधन किसी भी रिश्ते से ऊपर है। उन्होंने तय किया कि चाहे हालात जैसे भी हों, “त्रिकोण” की यह कहानी दोस्ती को खोकर खत्म नहीं होगी।
यह लघु कथा हमें यही सिखाती है कि जीवन में भावनाएँ कभी-कभी हमें उलझन में डाल देती हैं, पर समझदारी और त्याग से हम हर रिश्ते को बचा सकते हैं।
सितम्बर का महीना शुरू होते ही मौसम में एक अजीब-सी ठंडक और बदलाव महसूस होने लगता है। पेड़ों से झरते पत्ते जैसे पुरानी यादों को पीछे छोड़ने का संदेश देते हैं। इन्हीं दिनों की एक सुबह, अयान, नेहा और रोहित – तीन दोस्त – जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़े थे, जिसे वे खुद “त्रिकोण” कहते थे।
अयान और रोहित बचपन से सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों की पढ़ाई, खेल और सपनों की राह लगभग एक जैसी थी। नेहा उनकी कक्षा में नई आई थी और धीरे-धीरे दोनों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई। पढ़ाई में तेज़, स्वभाव में सरल और हर काम में ईमानदार, नेहा ने दोनों के दिलों को छुआ।
समस्या तब शुरू हुई जब अयान और रोहित – दोनों को ही यह एहसास हुआ कि वे नेहा को सिर्फ़ दोस्त से ज़्यादा मानने लगे हैं। यह स्थिति किसी साधारण उलझन की तरह नहीं थी, बल्कि उनके गहरे रिश्ते को परखने वाला समय था।
सितम्बर की वह सुबह कॉलेज कैंपस में तीनों साथ बैठे थे। पेड़ों से गिरते पीले पत्ते, ठंडी हवा और चिड़ियों की आवाज़ – सब कुछ सामान्य था, पर तीनों के दिलों में तूफ़ान मचा हुआ था।
नेहा ने चुप्पी तोड़ी –
“दोस्ती और प्यार कभी-कभी एक ही राह पर नहीं चलते। लेकिन जो सच्चा होता है, वही टिकता है।”
अयान और रोहित ने एक-दूसरे की ओर देखा। दोनों के मन में यह स्पष्ट हो चुका था कि दोस्ती का बंधन किसी भी रिश्ते से ऊपर है। उन्होंने तय किया कि चाहे हालात जैसे भी हों, “त्रिकोण” की यह कहानी दोस्ती को खोकर खत्म नहीं होगी।
यह लघु कथा हमें यही सिखाती है कि जीवन में भावनाएँ कभी-कभी हमें उलझन में डाल देती हैं, पर समझदारी और त्याग से हम हर रिश्ते को बचा सकते हैं।